Powered by Blogger.
NEWS FLASH ***
Showing posts with label solved paper. Show all posts
Showing posts with label solved paper. Show all posts

Saturday, March 15, 2014

SSLC Hindi Exam Mar. 2014 Model Answer Paper


Prepared by: Ravi. M., GHSS, Kadannappally, Kannur

1. तालिका की पूर्ति करके लिखें। 2
पाठ
प्रोक्ति
रचयिता
सकुबाई
एकपात्रीय नाटक
नादिरा ज़हीर बब्बर
बाबूलाल तेली की नाक
कहानी
स्वयंप्रकाश
वह तो अच्छा हुआ
कविता
भगवत रावत
वापसी
कहानी
उषा प्रियंवदा

2. अंग्रेज़ी शब्दों के स्थान पर समानार्थी हिंदी शब्द रखकर पुनर्लेखन- 2
चेन्नै जाने के लिए मैंने आरक्षण किया था, लेकिन माँ की बीमारी के कारण रद्दीकरण करना पड़ा। उनकी एक शल्यक्रिया थी।
3. कोष्ठक से घटनाएँ चुनकर सही क्रम से खाली स्थान की पूर्ति। 2
  • गजाधर बाबु रिटायर होकर घर वापस आया।
  • शाम का खाना पकाने की जिम्मेदारी बसंती को सौंप दिया।
  • गजाधर बाबु ने खर्च कम करने का सुझाव दिया।
  • चीनी मिल में नौकरी के लिए गया।
4. डौली की माँ की चरित्रगत विशेषताएँ। 2
  • गरीबों से नफ़रत करनेवाली
  • धोबी के बच्चों के साथ खेलने से डौली को मना करनेवाली।
5*. जीवन में पहली बार इतनी बुरी तरह ठगे गये हैं- बाबूलाल तेली ने ऐसा क्यों सोचा? 2
सेठ के शानदार अस्पताल में अनावश्यक टेस्टें करनी पड़ीं और विभिन्न मालों में घूम-फिरना पड़ा। ठीक इलाज के बिना ही बड़ी रकम देनी भी पड़ी। इसलिए बाबूलाल तेली को ऐसा लगा कि जीवन में पहली बार इतनी बुरी तरह ठगे गए हैं।
6*. ग्वाले के प्रति महादेवी का संदेह विश्वास में कैसे बदल गया? 2
कुछ दिनों तक निरीक्षण-परीक्षण, एक्स रे आदि के बाद पशु-चिकित्सकों ने निर्णय दिया कि गाय को सुई खिला दी गई है। किसी ने जान बूझकर गुड़ की डली में सुई रखकर खिलायी है बताने पर ग्वाला अप्रत्यक्ष हो गया था। तब ग्वाले पर महादेवी वर्मा का संदेह विश्वास में बदल गया।
7*. कवि ने कारखाने को स्वार्थ का प्रतीक कहा है तो नदी और साबून किनके प्रतीक हो सकते हैं? क्यों? 2
मानव और पशु-पक्षियों की सेवा करती रहनेवाली नदी शोषित का प्रतीक है क्योंकि सबकी सेवा करने पर भी मानव उसका सदा शोषण ही करता रहता है। नदी का जीवनपोषक गुण नष्ट करनेवाला साबुन शोषक का प्रतीक हैं।
8**. डिसेक्शन हॉल के अनुभवों के आधार पर देवदास की डायरी। 4
दिन:......................
तारीख:..................
आज मैं जल्दी उठकर तैयार हुआ। मेडिकल कॉलेज में आज मेरा पहला दिन था। थोड़ी-सी घबराहट थी। पहले एक ट्यूटर ने अनॉटमी हॉल में प्रवेश करने का निर्देश दिया। हाजिरी ली गई। हॉल में मर्तबानों में मानव शरीर के अंग दवा में डालके रखे गए थे। फिर प्रोफेसर डी. कुमार का भाषण था। बड़ा उपदेशात्मक और ज़ोरदार भाषण। पूरे उपदेश और निर्देश भरे थे। फिर डिसेक्शन हॉल। हॉल के अंदर मेज़ों पर एक-एक लाश पड़ी थी। हे भगवान! वहाँ की बदबू असह्य थी। ऊबाऊ तीखी गंध। आठ छात्रों के लिए एक लाश थी। मुझे और लक्ष्मी को एक हाथ मिला। यह बँटवारा लक्ष्मी को पसंद नहीं आई। वह कोई लड़की सहयोगी चाहती थी। एक कद्दावार टंकी में कई लाशें तैरती थीं। मौत का कुआँ जैसा लगता था। आज का दिन मैं कभी नहीं भूल सकता।
9**. ग्राहक विज्ञापनों के कारण बाज़ार में ठगे जाते हैं। विज्ञापनों के बुरे असर से बचने का संदेश देते हुए एक पोस्टर- 4
ग्राहको!
सावधान!!
बाज़ार से सामान खरीदते समय:
गुणवत्ता पर ध्यान दें।
विज्ञापनों के मोहजाल में न पड़ें।
ठगे न जाएँ।
मुफ़्त में कुछ मिलने के लिए,
अनावश्यक सामान न खरीदें।
माप-तौल पर विशेष ध्यान दें।
ग्राहक सुरक्षा समिति, मिनापुर

10**. हाथियों के झुंड द्वारा घर और खेत बरबाद हो जाते हैं। इस संबंध में अमल-राकेश के बीच का वार्तालाप। 4
अमल: अरे राकेश! क्या तुम जानते हो? एक हाथी ने गाँव में बड़ा हलचल मचा दिया है।
राकेश: बताओ न, क्या हुआ?
अमल: तोरपा ब्लॉक में उतरे एक हाथी ने कई घरों और इनसानों को रौंद डाला।
राकेश: हे भगवान! फिर?
अमल: कुछ लोग अस्पताल में हैं।
राकेश: ये सब क्यों होते हैं
अमल: इसका ज़िम्मेदार मानव ही है।
राकेश: कैसे?
अमल: मानव ने जंगल काट लिया तो हाथी को खाना और घर नष्ट हुए।
राकेश: याने तब हाथी गाँवों में उतरने लगे।
अमल: वे और क्या कर सकते हैं यार?
राकेश: अच्छा। तो इस समस्या का समाधान क्या है?
अमल: जंगलों को बचाना चाहिए। लेकिन जंगलों का नाश अब भी हो रहा है।
राकेश: वन संरक्षण के लिए सरकारी नियम तो हैं न?
अमल: नियम होने से क्या फायदा? नियम का पालन करना ही अनिवार्य है।
राकेश: ठीक है अमन। कल मिलेंगे।
अमल: ठीक है।
11**. मित्र के नाम फारसी पत्रकार का पत्र। 4
स्थान:.....................,
तारीख:....................।
प्रिय दोस्त,
तुम कैसे हो? घर में सब कैसे हैं? तुम्हारा काम कैसे चल रहा है? मैं यहाँ ठीक हूँ।
आज मुझे भारत के एक मशहूर पहलवान गामा से मिलने का अवसर मिला। उन्होंने बंबई में विश्व सारे पहलवानों को कुश्ती में चैलेंज दिया। तब मैंने उनसे पूछा कि क्या आप विश्व के सभी पहलवानों को चैलेंज देने से पहले अपने अमुक शिष्य से लड़कर विजय प्राप्त करके दिखाएँगे? वे बहुत हैरान हुए थे. उनका विचार है कि उनका शिष्य उनके पसीने की कमाई है, उनका खून है और उनमें और उनके शिष्य में कोई फरक नहीं है। इसके द्वारा वे यह समझा रहे थे कि भारत में गुरु-शिष्य पवित्र है। उन्होंने मुझसे यह भी कहा कि आप हिंदुस्तानी नहीं हैं इसलिए ऐसा पूछा है। मुझे भी बड़ा आश्चर्य हुआ।
तुम्हारे माँ-बाप को प्रणाम।
तुम्हारा मित्र,
(हस्ताक्षर)
नाम
सेवा में
मुस्तफ़ा.....,
…...................,
…....................।
12. कवितांश युवकों को संबोधित करता है। 1
13. 'अतुल्य शक्ति' 1
14. कवितांश का आशय 3
यह कवितांश युवकों को संबोधित करता है। इसमें युवकों की अतुल्य शक्ति के बारे में बताया गया है।
युवको! तुममें अतुल्य शक्ति है। शक्ति का सदुपयोग और दुरुपयोग दोनों हम कर सकते हैं। लेकिन जब हम अपनी अतुल्य शक्ति का सदुपयोग करते हैं तब बहुत बड़ा सकारात्मक परिवर्तन होता है। उस शक्ति का उपयोग सद्कर्म करने के लिए किया जाए तो हमारे देश का रूप बदल जाएगा, देश में बहुत बड़ी उन्नति होगी। इसलिए सदा सद्कर्म करते रहे।
रचनाकार यहाँ युवकों को अपनी शक्ति का उपयोग अच्छे कर्मों- राष्ट्र के विकास कार्यों- में करने का उपदेश देता है। राष्ट्र की प्रगति के लिए लक्ष्य करनेवाला यह उपदेशात्मक कवितांश बिलकुल अच्छा और प्रासंगिक है।
15. संशोधन करके खंड का पुनर्लेखन- 2
सुधा का बेटा श्रीचंद मेरी गाड़ी में स्कूल आया करता है। आज वह नहीं आया।
16. उचित विशेषण चुनकर खंड का पुनर्लेखन- 2
वह लंबा आदमी अपनी छोटी बहन के साथ उस टूटे-फूटेमकान में रहता है। उसके साथ बूढ़ी माँ भी है।
17. उचित योजक से वाक्य-मिलान- 1
आज स्कूल बस नहीं मिला इसलिए स्कूल में देर से पहुँचा।
18. 'उसकी' में प्रयुक्त सर्वनाम वहहै। 1
19. 'बच्चा सोचेगा' में बच्चा शब्द संज्ञा है। 1
20. व्यापारी पेड़ का निर्णय किस प्रकार करता है? 1
एक व्यापारी देखेगा कि पेड़ की लकड़ी कितनी बड़ी है, उससे कितने रुपए मिलेंगे।
21. पेड़ से हमें क्या-क्या लाभ हैं? 2
पेड़ों से हमें फल-फूल, लकड़ी, औषधियाँ, छाया, ऑक्सिजन आदि मिलते हैं। पेड़-पौधे प्रकृति को हरा-भरा, सुखदायक और आकर्षक बना देते हैं।
*      choiced question(2 from 3)

**    choiced question(3 from 4)

Sunday, February 23, 2014

आसरा 19 (23-02-2014)


  29-01-2014ന് ദേശാഭിമാനി അക്ഷരമുറ്റം സപ്ലിമെന്റില്‍ ജി.എച്ച്.എസ്.എസ്. ആനമങ്ങാട് സ്കൂളിലെ ഹിന്ദി അധ്യാപകനായ മനോജ്കുമാറിന്റേതായി പ്രസിദ്ധീകരിച്ച ഹിന്ദി ചോദ്യപേപ്പറിന്റെ മാതൃകാ ഉത്തരപേപ്പര്‍ .PDF രൂപം പോസ്റ്റിന് താഴെ നിന്ന് ഡൗണ്‍ലോഡ് ചെയ്യാം
 തയ്യാറാക്കിയത് : രവി. എം., ജി.എച്ച്.എസ്.എസ്., കടന്നപ്പള്ളി
1. तालिका की पूर्ति करें।                                                  2
पाठ
प्रोक्ति
रचयिता
नदी और साबुन
कविता
ज्ञानेन्द्रपति
बाबूलाल तेली की नाक
कहानी
स्वयंप्रकाश
सकुबाई
एकपात्रीय नाटक
नादिरा ज़हीर बब्बर
भारतीय संस्कृति में गुरु शिष्य संबंध
लेख
आनंद शंकर माधवन
2. घटनाओं को क्रमबद्ध करके लिखें।                                      2
  • चपरासी ने कमरा खोला
  • ट्यूटर महोदय रजिस्टर खोलकर हाजिरी लेने लगे।
  • डिसेक्शन हॉल में प्रवेश करने पर देवदास के नथुनों पर तेज़ बदबू घुसी।
  • देवदास कुछ क्षणों तक लाशों को देखता रहा।
3. गजाधर बाबू की विशेषताएँ।                                            2
  • घरवालों के मनोविनोद में भाग लेना चाने थे।
  • स्नेही व्यक्ति थे और स्नेह के आकांक्षी थे।
4. अंग्रेज़ी शब्दों के साथान पर समानार्थी हिंदी शब्द-                   3
    नाजिया अपनी खाता संख्या भूल गई थी। वह पूछताछ काउंटर पहुँची। वहाँ से उसको प्रबंधक से मिलने का निर्देश मिला।
5. गरीब मज़दूरों की गंदी गलियों के बच्चों को पढ़ाई करके जिंदगी में उच्च स्थान प्राप्त करने का  2 अवसर नहीं मिलता। उनके घरों में आवश्यक सुविधाएँ भी नहीं होतीं। इसलिए कवि भगवत रावत ने अपनी कविता 'वह तो अच्छा हुआ' में ऐसा कहा कि 'ऐसे बच्चे देश का भविष्य बन नहीं सकते थे'।
6. व्यापारियों की तरफ़ से व्यापार बढ़ाने के लिए कुछ-न-कुछ ऑफर दिए जाते हैं। 'दो खरीदें,  2  
एक मुफ्त में लें' जैसे। वास्तव में यह एक प्रकार की ठगी है। लेकिन ग्राहकों के मन को लुभाने के लिए ऐसा कर रहे हैं। बड़े दाम में सामान बेचे जा रहे हैं।
7. हमारे देश में बेकारी की समस्या के कारण पढ़े-लिखे लोग और अनपढ़ लोग घूम रहे हैं। कुछ   2 नौकरियाँ भी ऐसी हैं जिसके लिए घर-घर घूमना पड़ता है। 'सकुबाई' नामक एकपात्रीय नाटक में अनपढ़ सकुबाई मेमसाब के घर में डिटर्जेंट बेचने के लिए आई लड़की को देखकर ऐसा कह रही कि- 'रोज़गार के लिए पढ़े-लिखे लोग भी घर-घर घूमते हैं और अनपढ़ भी'।
8. डिसेक्शन हॉस का अनुभव: देवदास की डायरी।                                  4
तारीख: …....................
         आज मेडिकल कॉलेज में मेरा पहला दिन था। थोड़ी-सी घबराहट के साथ मैं जल्दी ही कॉलेज पहुँचा। पहले एनॉटमी हॉल में प्रोफेसर डी. कुमार का भाषण था। ज़ोरदार, उपदेशात्मक भाषण। फिर डिसेक्शन हॉल में। हे भगवान! नौ मेज़ों पर एक-एक लाश और एक कद्दावार टंकी जिसमें लाशें तैर रही थीं। मौत का कुआँ जैसा लगा। हॉल में प्रवेश करते ही तेज़ बदबू नाक में घुसी थी। हम आठ छात्रों के लिए एक लाश थी। उन लाशों से हमें मानव शरीर की जटिल एनॉटमी सीखनी है। मेरी सहयोगी थी लक्ष्मी। हम दोनों को लाश का एक हाथ मिला। लेकिन यह विभाजन लक्ष्मी को पसंद नहीं आया। वह कोई लड़की सहयोगी चाहती थी। आज के दिन का अनुभव मैं कभी नहीं भूलूँगा।
9. गौरा की मृत्यु हुई: श्यामा के नाम महादेवी का पत्र।                           4
                                                                    स्थान:....................,
                                                                   तारीख:....................।
प्यारी बहन,
       कैसी हो? घर में सब कैसे हैं? मैं यहाँ ठीक हूँ।
       श्यामा, आज हमारी गौरा की मृत्यु हुई। तुम्हें मालूम था न कि कुछ दिनों से उसकी इलाज चल रही थी। वह बहुत दुर्बल हो गई थी। उस निर्मम ग्वाले की सुई ने हमारी प्यारी गाय का अंत कर दिया। आज सुबह, ब्रह्ममुहूर्त में, मेरे सामने ही उसकी मृत्यु हुई। उस निष्ठुर ग्वाले के विरुद्ध कोई कानूनी कार्रवाई लेने के लिए हमारे पास प्रमाण भी नहीं। लालमणि के बारे में सोचकर में ज़्यादा चिंतित होती हूँ। मैंने गौरा का पार्थिव अवशेष गंगा मैया को समर्पित किया।
       घर में सबको मेरा हैलो बोलना। शेष बातें अगली चिट्ठी में।
                                                                              तुम्हारी बहन,
                                                                                 महादेवी।
सेवा में
        श्यामा......,
        …..............
        …..............
10. गजाधर बाबू - गणेशी टेलिफोन पर बातचीत (घर पहुँचने पर निराशा के 
     अनुभव)                                                                         4
गजाधर बाबू: हैलो, गणेशी है?
गणेशी:        हाँ जी, मैं गणेशी बोल रहा हूँ। आप कैसे हैं?
गजाधर बाबू: ऐसे ही चल रहा है। तुम कैसे हो गणेशी
गणेशी:       मैं तो ठीक हूँ जी। मैंने आज भी आपके बारे में सोचा था। परिवार के साथ 
              बड़ी खुशी के साथ रहते होंगे न जी?
गजाधर बाबू: वह मेरी इच्छा मात्र रह गई गणेशी।
गणेशी:       क्यों जी? ऐसा क्यों बता रहे हैं?
गजाधर बाबू: मेरी बीबी-बच्चों को मेरे पैसे ही चाहिए। उनके लिए मेरी उपस्थिति भी 
              अच्छी नहीं लगती।
गणेशी:       हे भगवान! मैं क्या सुन रहा हूँ! पैंतीस साल तक अकेले रहकर परिवार के 
              साथ रहना शुरू करने पर ऐसा अनुभव?
गजाधर बाबू: मेरा परिवार मस्ती खुशी में ही सदा तत्पर है। कोई भी काम करने के लिए 
              तैयार नहीं। वेतन नहीं पेंशन मात्र है न? मैंने नौकर को छोड़ दिया। लेकिन 
              उससे मेरा परिवार असंतृप्त है।
गणेशी:       आपकी बीबी कैसी है जी?
गजाधर बाबू: बीबी तो सदा शिकायत करती है कि मैं अकेले साम करती हूँ, कोई भी 
              सहायता नहीं करता आदि। उससे खुशी की बातें कभी भी नहीं सुनतीं।
गणेशी:       आगे क्या करते हैं जी? वापस आते हैं? मेरे साथ रहकर काम करेंगे?
गजाधर बाबू: नहीं गणेशी। मैं एक चीनी मिल में नौकरी के लिए जाने के बारे में सोच 
              रहा हूँ। ठीक है गणेशी, फिर से फोन करूँगा।
गणेशी:      जी, ज़रूर कीजिए। धन्यवाद।


11. 'पर्यावरण की सुरक्षा में जैवविविधता का महत्वपूर्ण स्थान है' -  
     पोस्टर                                                                4
पर्यावरण हमारा रक्षा कवच है
पर्यावरण की रक्षा करें।
        जैविक विविधता पर्यावरण की रक्षा करती है।
    सावधान!
जंगलों का नाश न करें।
जलस्रोतों को सुरक्षित रखें।
प्लास्टिक का उपयोग कम करें।
पहाड़ियों को न मिटाएँ।
खेतों को बचाएँ।
नदियों से रेत न निकालें।
कारखानों पर नियंत्रण रखें।
           हमारे लिए, आगामी पीढ़ी के लिए
      पर्यावरण को बचाएँ।
    12. इस कविता का विषय 'शहरीकरण का फल' है।                        1
    13. कवितांश का शीर्षक- 'शहर'।                                 1
    14. यह कवितांश मशहूर कवि रामेश्वर कांबोज हिमांशु से लिखा गया है। इसमें कवि 
     शहरीकरण की हानियों पर पाठकों का ध्यान आकर्षित करते हैं।
          एक डाल से टूट गया पत्ता उड़ते-उड़ते कलकत्ता नगर पहुँचा। महानगर की भीड़ देखकर बेचारा पत्ता घबराया। कहीं भी देखें धूल-धुआँ हैं। पत्ते का सिर चक्कराने लगा। महानगर का शोरगुल सुनकर उसके कान का परदा फट गया। बहुत घबराकर बेचारा पत्ता किसी न किसी तरह अपनी बगिया में वापस आया।
          शहरीकरण के दुष्प्रभाव कवि ने अच्छी तरह व्यक्ति किया है। शहरीकरण एक विकराल समस्या बनते इस ज़माने में यह कवितांश बिलकुल प्रासंगिक और अच्छा है।            4
    15. संशोधन                                                                    2
    सैकड़ों वर्ष पहले की बात है। एक नगर में चित्रसेन नामक एक चित्रकार रहता था। वह चित्रकला में बड़ा पारंगत था। धीरे-धीरे उसकी ख्याति पूरे राज्य में फैलने लगी।
    16. योजक से वाक्यों को मिलाकर लिखें।                                      1
         डॉक्टर से मिला और दवा भी ली लेकिन बुखार से आराम नहीं मिला।
    17. गुलाम शब्द संज्ञा है।                                                        1
    18. इसका में निहित सर्वनाम यह है।                                            1
    19. अनुभव शब्द का समानार्थी शब्द महसूस है।                                1
    20. समाज में बदलाव का असर बोली पर ज्यादा पड़ता है।                   1
    21. दास के अर्थ में गुलाम शब्द के इस्तेमाल के पीछे यह तथ्य भी छुपा है कि किसी ज़माने में अरब देशों में सेवा टहल के लिए बच्चों को काम में लिया जाता रहा।                    2
    22. उचित विशेषणों से खंड का पुनर्लेखन                                 2
    पड़ोसी के अहाते में आम और अमरूद के बड़े पेड़ हैं। उन्हीं के पास जासोन के लाल फूल खिले रहते हैं। ये फूल देखने में बहुत सुंदर हैं। कोई उन्हें तोड़ लें तो दूसरे दिन फिल खिल उठते हैं।



    Downloads:

    Thursday, February 13, 2014

    आसरा 17 (13.02.2014) - (13-02-2014)sslc model answer

    Flashing hot - Click image to download.PDF രൂപം പോസ്റ്റിന് താഴെ നിന്ന് ഡൗണ്‍ലോഡ് ചെയ്യാം
    1. तालिका की पूर्ति करके लिखें। 2
    पाठ
    प्रोक्ति
    रचयिता
    मुफ़्त में ठगी
    कविता
     रामकुमारआत्रेय
    वापसी
    कहानी
    उषा प्रियंवदा
    भारतीय संस्कृति में गुरु शिष्य संबंध
    लेख
    आनंद शंकर माधवन
    सकुबाई
    एकपात्रीय नाटक
    नादिरा ज़हीर बब्बर
    2. आंग्रेज़ी शब्दों के स्थान पर उनके समानार्थी शब्दों से खंड का पुनर्लेखन 3
    पिताजी डाक घर में डाक टिकट और अंतर्देशीय पत्र कार्ड खरीदने गये। वहाँ वे जीवन बीमा निगम के एक कर्मचारी मिले।
    3. कोष्ठकों से घटनाएँ चुनकर खाली स्थानों की पूर्ति- 2
    • डॉक्टर की लापरवाही शीर्षक से समाचार पत्र में खबर निकली।
    • बाबूलाल तेली को चिकित्सा के लिए मुंबई भेज दिया।
    • बाबूलाल तेली की नाक पूर्ण रूप से काटकर फ़ेंक देनी पड़ी।
    • बाबूलाल तेली को जुलूस के रूप में घर लाया गया।
    4. गजाधर बाबू की विशेषताएँ- 2
    • परिवार के लिए परिश्रम करनेवाला।
    • परिवार से प्रेम रखनेवाला।
    सूचनाः 5 से 7 तक के प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लिखें।
    5. नदी मानव की स्वार्थपूर्ति के लिए बनाए गए कार्खानों से विषैला जल और कूड़े-कचड़ आदि से बिलकुल प्रदूषित हो गई है। इसलिए कवि ने कहा है कि नदी की शुभ्र त्वचा बैगनी हो गई। 2
    6. भारतीय संस्कृति के अनुसार एक गुरु के लिए अपना शिष्य अपने बेटे से भी प्यारा होता है। संगीतकारों, पहलवानों और साधुओं के बीच में आज भी अच्छा गुरु-शिष्य संबंध कायम है। गामा के कथन से यही व्यक्त होता है। यह अच्छा और अनुकरणीय है।
    7. मध्यवर्गीय परिवार के लोगों का विचार है कि हमने घर का काम करने के लिए बाई रखी है तो हम काम क्यों करें। घर के सारे-के-सारे काम नौकरानियों पर छोड़ने का बुरा मनोभाव यहाँ व्यक्त होता है।

    सूचनाः 8 से 11 तक के प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लिखें।

    8. गौरा की दयनीय दशाः महादेवी वर्मा और पशु चिकित्सक के बीच का
    वार्तालाप। 4
    महादेवीः आइए डॉक्टर, हमारी गौरा की जाँच कीजिए।
    पशु चिकित्सकः हाँ जी, हम आपकी गौरा की जाँच अभी करते हैं। अच्छा गाय को क्या
    हुआ है?
    महादेवीः आजकल यह दाना-चार बहुत कम लेती है और उत्तरोत्तर कमज़ोर
    होती जा रही है।
    पशु चिकित्सकः कितने दिनो से यह दिखाई पड़ा है?
    महादेवीः 10-15 दिनों यह ऐसी है। ऐसा क्यों होता है डॉक्टर?
    पशु चिकित्सकः जाँच करना पड़ेगा।
    महादेवीः क्या यह कोई बीमारी होगी डॉक्टर?
    पशु चिकित्सकः मुझे संदेह है कि उसके पेट में सुई पहुँची है।
    महादेवीः सुई! वह कैसे होती है! दाना-चारा तो हमीं देते हैं।
    पशु चिकित्सकः दाना-चारा के साथ सुई पेट तक नहीं पहुँचती। मुँह में छिदकर रहती है। किसी ने खिलाई होगी।
    महादेवीः कैसे बचा सकते हैं डॉक्टर?
    पशु चिकित्सकः निश्चित रूप से बताने के लिए एक्स रे, निरीक्षण-परीक्षण आदि करना
    पड़ेगा।
    महादेवीः जल्दी कीजिए। मेरी गौरा को बचाइए।
    9. एनॉटमी हॉल के अनुभवों के आधार पर मित्र के नाम देवदास का पत्र। 4
    तिरुवनंतपुरम,
    तारीखः...............।
    प्रिय महेश,
    तुम कैसे हो? घर में सब कैसे हैं? मैं यहाँ ठीक हूँ।
    मेडिकल कॉलेज में आज मेरा पहला दिन था। थोड़ी-सी घबराहट के साथ आज मैं कॉलेज पहुँचा। एनॉटमी हॉल में एनॉटमी के प्रोफेसर डॉ. कुमार ने बड़ा भाषण दिया। पूरे भाषण में उपदेश और निर्देश थे। वे कह रहे थे कि, यह एक निस्वार्थ सेवा है, पैसे की लालच में कोई भी डॉक्टर न बने आदि। डॉक्टर के लिए वसुधा ही कुटुंब है। उसे धर्म, जाति, लिंग, भाषा, रंग आदि किसी भी भेदभाव नहीं होना चाहिए। उनका भाषण समाप्त होने पर ऐसा लगा कि एक आँधी उभरी और धम गई। हॉल में बड़े मर्तबानों में मानव शरीर के विभिन्न अंग दवा में डालकर रखे थे। क्या-क्या पढ़ना होगा!
    तुम्हारे माँ-बाप को मेरा प्रणाम। शेष बातें अगले पत्र में।
    तुम्हारा मित्र,
    देवदास।
    सेवा में
    श्री. के. महेश,
    ….................
    10. पिल्लों को गरम पानी में डुबोकर मरवा दिया है। डौली की डायरी। 4
    तारीखः...................
    आज मैं स्कूल से वापस आने पर पिल्ले गायब थे। मैं लंबी देर तक ढूँढती रही। लेकिन अंत में पता चला कि उनको गरम पानी में गोता देकर मरवा दिया गया है! मेरी मामा और आया पहले झूठ बोल रही थीं। मैं रो-रोकर बेहाल हो गई। शामको मैंने कुछ नहीं खाया। हे भगवान! इतने प्यारे पिल्लों के कैसे मार सकते हैं! मेरे मामा-पापा कैसे यह निष्ठुर कार्य करवा सकते हैं! मैं उनसे बात नहीं करूँगी। मेरे लिए यह असह्य है। आया ने कहा था कि डैनी पिल्लों को पर्याप्त मात्रा में दूध दे नहीं सकती। मैं विश्वास नहीं करती। यह बड़ी निर्ममता है। यह दिन मैं कैसे भूलूँ।
    11. हाथियों द्वारा मरे हाथी को दफ़नाने की घटना अगले दिन के समाचार पत्र
    में। 4
    साथियों ने किया हाथी का शवदाह
    राँची : तोरपा जंगल के बीच की सड़क पर नीचे गिरे बिजली के तारों से झटका लगकर एक हाथी मर गया था। खबर पाते ही गाँववाले वहाँ पहुँचे और लाठी से मारकर, ठोकर मारकर और चाकू से मारकर अपना गुस्सा उतारने लगे। क्योंकि कुछ दिन पहले एक जंगली हाथी ने तोरपा ब्लॉक के कई घरों और इनसानों को रौंद डाला था। पुलिसवाले भी दाँत निकालकर उनके साथ लगे थे। एक महीने तक लाश वहाँ पड़ी रही। फिर हाथियों का झुंड वहाँ आकर उसके चारों ओर घेर लिया। किसी को उसके पास तक फटकने नहीं दिया। दिन रात उसकी रखवाली करके वे जंगल में एक गड्ढा ढूँढकर उसमें दफनाया। मानव लाश पर भी अत्याचार कर रहे थे, लेकिन हाथियों ने अपने साथी की लाश का अंतिम संस्कार किया।
    सूचनाः कवितांश पढ़कर 12 से 14 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।
    12. सूरज हमको जगाता है। 1
    13. 'सूरज' 1
    14. कविता का आशय- 3
    यह कवितांश सूरज के महत्व के बारे में बताता है।
    कवि कहता है कि सूरज आसमान में सुबह आकर हमको रोज़ जगाता है। वह अपने पथ पर कभी नहीं रुकता। एक ही गति में आगे बढ़ता रहता है। गर्मी में सूरज आग के समान गर्मी पैदा करता है। लेकिन यही सूरज बरसात के दिनों में चुपके से आकर सात रंगों का इन्द्रधनुष बनाता है। तब आकाश बहुत सुंदर होता है।
    सूरज रोज़, निरंतर एक ही गति में चलकर हमें रात और दिन देता है। रोशनी, गर्मी और ऊर्जा देकर वह हमारी बड़ी सहायता करता है। सूरज का महत्व बतानेवाला यह कवितांश बहुत अच्छा है।
    सूचनाः संशोधन करके खंड का पुर्लेखन करें।
    15. वर्षा का दिन था। राजू ने उसकी (अपनी) छतरी नहीं ली थी। वर्षा समाप्त होने तक स्कूल में वह खड़ा रहा।
    2
    सूचनाः उचित विशेषण चुनकर खंड का पुनर्लेखन करें।
    16. छोटा बच्चा प्यासा था। वह ठंडा पानी पीने का इच्छुक था। 2
    सूचनाः उचित योजग चुनकर वाक्यों को जोड़कर लिखें।
    17. कल छुट्टी है इसलिए (कल) पढ़ाई नहीं है। 1
    सूचनाः खंड पढ़कर 18 से 21 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।
    18. 'उसमें' में प्रयुक्त सर्वनाम वह है।
    19. 'एक विचित्र बीमारी फैल गई।' वाक्य में 'बीमारी' शब्द संज्ञा है। 1
    20. 1945 में हिरोशिमा में एटम बम गिरा। 1
    21. हिरोशिमा शहर में परमाणुबम गिरने से हुए विस्फोट में पूरे शहर का नाश हुआ। गर्मी, सर्दी, महामारी आदि इस विस्फोट के बाद की आपदाएँ थीं। लाखों लोगों की मृत्यु हुई, उससे भी अधिक लोग घायल हुए। परमाणु बम ने पूरे शहर को तहस-नहस कर डाला। 2

    PDF Download from here

    Downloads:

    © hindiblogg-a community for hindi teachers
      

    TopBottom