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ഒരു ഹൈടെക് പുതുവര്‍ഷത്തിലേയ്ക്ക് ഏവര്‍ക്കും സ്വാഗതം.....

അഭ്യാസമില്ലാത്തവര്‍ പാകം ചെയ്തെതെന്നോര്‍ത്ത് സഭ്യരാം ജനം കല്ലുനീക്കിയും ഭുജിച്ചീടും..എന്ന വിശ്വാസത്തോടെ

Thursday, December 17, 2015

उत्तर सूचिका नवीं कक्षा 2015 दिसंबर

ഹിന്ദി അധ്യാപകരുടെ ഒരു വാട്സ് ആപ് ഗ്രൂപ്പാണ്  हिंदी शिक्षण साथी. മറ്റ് ഹിന്ദി ഗ്രൂപ്പുകളില്‍ നിന്ന് വ്യത്യസ്ഥമായി ഗ്രൂപ്പിലെ നിയമാവലികള്‍ അനുസരിക്കുന്നു എന്നതും അഡ്മിന്‍മാരടക്കം എല്ലാവരും സമഭാവേന അംഗീകരിക്കപ്പെടുന്നു എന്നതും ഇവിടെ കണ്ട പ്രത്യേകതയാണ്. സ്വയം ഒന്നും ചെയ്യാതെ കുറ്റം പറയുകമാത്രം ചെയ്യുന്ന പണ്ഢിതന്മാര്‍ ഇവിടെ ഇല്ലാത്തതു കൊണ്ട് മിക്കവരും തങ്ങളുടെ ഉല്പന്നങ്ങള്‍ ആത്മവിശ്വാസത്തോടെ ഇവിടെ പോസ്റ്റ് ചെയ്യുന്നതായി കാണുന്നത് സന്തോഷം തന്നെ. ആ ഗ്രൂപ്പില്‍ നിന്ന് കിട്ടിയ ഉത്തര സൂചികയാണിത്. തയ്യാറാക്കിയ ശരത്കുമാര്‍ മാഷുടെ അനുവാദത്തോടെ ഹിന്ദിസഭ അത് നന്ദിപൂര്‍വ്വം പ്രസിദ്ധീകരിക്കുന്നു. ബുദ്ധിമുട്ടില്ലാത്തവര്‍ (ബുദ്ധിമുട്ടില്ലാത്തവര്‍ മാത്രം) അഭിപ്രായം കമന്റുചെയ്താല്‍ അത് ശരത്‌ മാഷെപ്പോലെയുള്ളവര്‍ക്ക് തുടര്‍ന്നെഴുതാന്‍ ഒരു പ്രേരണയാകും...
1.तालिका की पूर्ति :

पाठ
प्रोक्ति
रचयिता
मेरा सबकुछ अप्रिय है उनकी नज़र में
कविता
निर्मला पुतुल
सिपाही की माँ
एकांकी
मोहन राकेश
मेमना
कहानी
लोकबाबू
ऐसा था मेरा बचपन
आत्मकथा
ओमप्रकाश वाल्मीकि

2. सही क्रम से लिखें
  • मुन्नी डाकवाली गाड़ी की आवाज़ सुनकर बाहर चली जाती है।
  • मुन्नी निराश होकर लौटती है।
  • बिशनी चिट्ठी के बारे में पूछती है।
  • केवल चौधरी का पिंसन का मनिआर्डर आया है।
3. चरित्रगत विशेषताएँ :
-
अच्छे बीजों की तलाश करनेवाला ।
-
अन्याय के प्रति आवाज़ उठानेवाला ।
सूचना:उचित उत्तर चुनकर लिखें :
4.
परिहास करना
5.
हेडमास्टर ने
6.
मानक की
7.
गाँधीजी
सूचना :8 से 10 तक के प्रशनो में से किन्हीं दो के उत्तर लिखें
8.
हम इससे सहमत नही । चुहडा होने के कारण ओमप्रकाश को कक्षा में बैठकर पढ़ने का अवसर कलीराम ने नही दिया। छात्रों के प्रति कलीराम का यह मनोभाव एक हेडमास्टर के लिए उचित नही है ।
9.
हिरोशिमा में अणुबम फटने के कारण वहाँ के मानव की मृत्यु हुई । इधर कवि ने प्रतीकात्मक रूप से ऐसा कहा होगा ।
10.
किसान को खेती केलिए कोई लाभ नही मिलता । इसलिए उनको खेती छोड़कर अन्य काम केलिए शहर जाना पड़ता है । नये काम केलिए जाते किसान का मनोभाव यहाँ प्रकट है ।
संशोधन :
11.
डिब्बे में शेष सभी यात्रियों का ध्यान इनकी ओर ही था । उनकी सहानुभूति किसान की ओर थी ।
बहुवचन में बदलकर वाक्य का पुनर्लेखन :
12.
लड़कियाँ स्कूल जाती हैं ।
योजक का प्रयोग :
13.
सूरज निकला ओर प्रकाश फैल गया ।
14.
मिलजुलकर
15.
एकता
16.
वन में खुशी से रहते पक्षियों का वर्णन है यह कविता । खंजन, कपोत, चातक,कोकिल, काक, हंस, शुक आदि सब मिलजुलकर वहाँ रहते हैं। पक्षियों का घर आसमान हैं । उनकी इच्छा के अनुसार वे कहीं जाते हैं । वन में उनको आजादी काफ़ी हैं ।
17.
सागर ओर नदियों से जल, वाष्पीकरण द्वारा बादलों का रूप धारण करता है ।
18.
पृथ्वी सब्द - संज्ञा है ।
19.
वर्षा के बाद तालाबों,पोखरों,झीलों,आदि में जल पहुँचता है ।
20.
क्रिया सब्द - गिरता , रुक जाता
21.
इसका मैं प्रयुक्त सर्वनाम है - यह
22.
पोस्टर :
23. मुन्नी की डायरी :
मंगलवार  
15/12/2015आज भी भैया की चिट्टी नहीं आयी । माँ बहुत दुखी हैं । कुंती दीदी ओर चौधरी के वचन माँ की परेशानी को कम करने लायक नहीं । इतने में दो बर्मी लड़कियाँ भी आयी । उन्होने युद्ध के बारे में जो कूछ कहा , भूल न सकते । वहाँ भैया की स्थिति क्या होगी ? उनके लिए ईस्वर से प्रार्थना करने के अलावा यहाँ में क्या कर सकूं । समय ग्यारह हो चुकी । फ़िर भी नींद नहीं आती . . . .
24.  गांधीजी और अहिंसा
गांधीजी अहिंसा के प्रयोक्ता थे । अहिंसा और अप्रतिकार का भारतीय धार्मिक विचारों में उन्होंने एक लंबा इतिहास बनाया । गांधीजी अपने आत्मकथा में अपने जीवन के मार्ग का वर्णन किया है। उन्होंने बताया - इतिहास सत्य का मार्ग होता है किंतु प्रेम इसे सदैव जीत लेता है।
गाँधीजी की राय में अहिंसा तो बिना मारे या चोट पहुँचाए 'करने या मरने ' का तरीका हैं । इसके इस्तमाल करने में धन की ज़रूरत नहीं है। अहिंसा के मार्गे में पराजय नाम की कोई चीज़ नही । इसमें विनाशकारी हथियार भी नही होना चाहिए । इस तरीके से लोगों को कोई नुकसान भी नही पहुँचेगा । गाँधीजी विश्व मैत्री और शांती में विश्वास करते हैं ।
25.
ओमप्रकाश का पत्र :  
स्थान
तारीख
प्रिय मित्र ,
कैसे हो ? मैं तुमसे एक बात कहना चाहता हूँ । पिछले हफ्ते एक नये स्कूल में प्रवेश किया । वहाँ से मुझे कूछ बुरे अनुभव हुए । स्कूल का हेडमास्टर का नाम है कलीराम । वे अपने नाम जैसे क्रूर स्वभाव वाला एक आदमी है। उन्होंने मुझे क्लास में बैठकर पढ़ने का अवसर नहीं दिया । तीन दिन मुझसे उन्होंने स्कूल में झाडू लगाया । ये सब मैं चुहडे होने के कारण . . तीसरे दिन शामको मेरे पिताजी ने यह दृश्य देखा । इसके बारे में पूछने पर हेडमास्टर ने पिताजी को धमकाया । लेकिन पिताजी ने निर्भय से उनको सही जवाब दिया । पिताजी का साहस और यह घटना मैं भूल नहीं सकता ।

आपका प्रिय मित्र नाम
(
हस्ताक्षर )
सेवा में
नाम
पता।

10 comments:

  1. बढिया काम शरतजी शुक्रिया।

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  2. sarath ji,badiyaa kaam...achaa prayaas bhi....badhaayiyaam..

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  3. sarth saab..aapka prayas tho zaroor prasamsaneey hei..dhodee vyakaranik thrutiyaan tho hei..magar koyee baath naheen,,aage baddo..hum peeche hei..Dhanyavaad

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  4. शरत् सर ,कमाल है आप का कलाम...
    इसीलिए तो आप को मेरा सलाम...

    ReplyDelete
  5. शरत् सर ,कमाल है आप का कलाम...
    इसीलिए तो आप को मेरा सलाम...

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