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Monday, December 02, 2013

सकुबाई


समस्या : शहरीकरण अकेलापन और मानसिक संघर्ष का कारण बन जाता है।
आशय : शहरी जिन्दगी की दौड़ में मानव अपना दायित्व भूलकर एक तरह का याँत्रिक जीवन बिता रहा है। ऐसे घरों में काम करनेवाली औरतों की दशा बड़ी दुखदायक है।
सहायक सामग्री : शहर के एक संपन्न परिवार में अकेले काम करनेवाली एक नौकरानी का दृश्य दिखानेवाली सी.डी./चित्र/रपट/कहानी का अंश आदि।
प्रवेश प्रक्रिया : सी.डी का प्रदर्शन ।
पहला अंतर :
चित्र के आधार पर प्रश्न पूछें।
? यह घटना कहाँ होती है? शहर में या गाँव में?
? औरत घर में अकेली है। क्यों?
? घरेलू सामान इधर-उधर बिखरे पड़े हैं। क्यों?
  • शहरी जीवन के जल्दबाज़ में घरवाले अस्त-व्यस्त है ।
उपर्युक्त औरत की तरह घर का पूरा-का-पूरा काम करनेवाली एक औरत है सकुबाई। देखें वह क्या कहती है।
पाठभाग का वाचन :
(बंबई में रहनेवाले........घंटी बजती है ट्रिन ट्रिन)
अध्यापक प्रश्न पूछें -
? मालिक के घर की हालत कैसी है?
? घर की हालत क्यों ऐसी होती है?
? सकुबाई कहाँ से आती है?
? घर की हालत देखकर सकुबाई क्या करती है?
? सकुबाई की बेटी का नाम क्या है?
  • व्यस्त शहरी जीवन बितानेवाले कर्मचारियों के घर की हालत के बारे में एक टिप्पणी लिखें।
सहायक बिंदु:
  • कर्मचारियों के व्यस्त जीवन
  • बच्चों की देख-रेख में समय की कमी
  • समय पर दफ़्तर पहुँचना
  • घरेलू काम में नौकरों की कमी
  • आधुनिक पारिवारिक व्यवस्था
अगला अंतर :
वाचन प्रक्रिया चलाएँ -
(आती हूँ.......हमेशा कहते थे।)
? सकुबाई के घर में क्यों पानी भर गया था?
? वह क्यों जल्दी घर जाना चाहती थी?
? सकुबाई के घर में कौन-कौन थे?
? सकुबाई का पूरा नाम क्या है?
? पाठशाला जाने की बात पर सकुबाई की माँ ने क्या कहा?
? किसके लिए आई ने अपनी पायल बेची?
प्रक्रिया: टेलिफोन पर सहेलियों के बीच के वार्तालाप की पूर्ति करें।
  • रश्मी के घर की नौकरानी आज देर से आएगी इसलिए वह स्कूल में लेट होगी, तो अपनी सहेली श्यामा से टेलिफोन पर बातें करती है।
रश्मी : हैलो श्यामा, आज मेरे आने में देरी होगी।
श्यामा : क्या बात है?
रश्मी : नौकरानी नहीं आई। वह हमेशा ऐसी है।
श्यामा : .......................................
रश्मी  : ......................................
अतिरिक्त कार्य -गृहकार्य के रूप में दें
  • सकुबाई अपने मेमसाब से टेलफोण पर बोतें करती है । वह कैसा होगा?
अगला अंतर :
गृहकार्य की प्रस्तुति चुनिंदे चात्र करें।
अध्यापक की प्रस्तुति ।

सकुबाई : हलो …

मेमसाहब : हाँ...,मैं हुँ ..

सकुबाई : मेमसाब..हाँ नमस्ते।

मेमसाहब : अरे, तू आज देर से आई

सकुबाई : हाँ , आज थोड़ी देर हो गई थी।...क्या करती मेम साब,कितना पानी पड़े रहा था।घर के अंदर भी पानी भर गया मैं अपना बिस्तर -बिस्तर सब सुमन के घर पर रख के आई।

मेमसाहब : वहाँ एक थैला पड़ा है न ?

सकुबाई : क्या, … हाँ हां बोलो , मैं सुनती …. कौन -सा

मेमसाहब : अरे.., कुरसी के पास पड़ा होगा ।

सकुबाई : हाँ...हाँ पड़ा है।

(थैला उठाकर चेक करते हुए ) ब्लूवाली ?

मेमसाहब :हाँ...उसको जगदीस के यहाँ पहूँचना ।

सकुबा : इसको जगदीश के यहाँ फाँल लगाने का है।अच्छा ठीक है।मैं रात का खाना बनाऊँ ?

मेमसाहब : नहीं ,कुछ नहीं बनाना।

सकुबाई : ठीक है,मेमसाब, आज मुझे खाना भी नहीं बनाना है। मेमसाब , आज शाम को मैं जल्दी घर जाऊँ..?

मेमसाहब : ऐसा क्यों ?

सकुबाई : वो क्या है, आज इतना पारी बरसा घर में पानी भर गया है न ..थोडा टाइम से जाते तो सफ़ाई-सफाई करके साइली के लिए कुछ बना देती...

मेमसाहब : नहीं , हमारे आने पर ही जाना ।

सकुबाई : अच्छा ठीक है। नहीं जाती ।
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वाचन प्रक्रिया:
(मेरे बाबा चुप.......लोग बराबर हुए।)
? सकुबाई के घर की हालत क्या थी?
? सकुबाई की दादी के मरने पर क्या हुआ?
? सकुबाई कैसे बंबई पहुँची?
? नितिन को क्यों साथ लाया?
? लड़की के बारे में सकुबाई क्या सोचती है?
? भगवान से सकुबाई की प्रार्थना क्या थी?
लेखन प्रक्रिया :
? सकुबाई की आत्मकथा का अंश अपने शब्दों में लिखें।
दल में प्रस्तुति ।
अध्यापक की प्रस्तुति ।
मेरी कहानी
मैं सकु...सकुबाई पैंतालीस साल की मराठी औरत हुँ। मेहनती होने की वजह से चौड़ी और मज़बूत हुँ । यहाँ मुंबई में सात साल की उम्र में आयी थी। बचपन में गाँव में रहनेवाली थी । मेरी माँ , बहन वासंती और एक भाई नितिन । मेरा नाम शकुन्तला रखी थी। मां ने मुझे पाठशाला जाना नहीं दिया । बचपन में हड्डी तोड़कर काम करने पर भी खाना पूरा नहीं मिलता था । काका लोग मेरे पिताजी को तंग करते थे। मामा मुझे और मेरी माँ और भाई को लेकर मुंबई में आया । मेरे पिताजी और एक बहन गाँव में रहते हैं। बिदाई के समय दोनों रो रहे थे ।यहाँ एक बड़े घर में नौकरानी हुँ । यहाँ सबकुछ मैं कर रहा हुँ। मेरे साहब और मेंसाहब बहूत अच्छे हैं। साहब का नाम किशोर कपूर और मेंसाहब का पूजा कपूर। दो बच्चे हैं - पोमल और रौकी । दोनों को मैं बहूत प्यार करती हुँ । मैं यहां एक नौकरानी नहीं हुँ, इस परिवार का एक अंग हुँ।आज मैं बहूत खुश हुँ । कभी-कभी मैं अकेले बैठकर बचपन के बारे में सोचविचार कर रही हुँ ।
अगला अंतर :
भाषा की बात:
अनेकार्थी शब्दों का परिचय:
कर:
दिनेश ने कहा- ""रामू तू अपना काम कर।""
पुराने ज़माने में जनता राजा को कर देते थे।
कल:
मैं कल ज़रूर आऊँगा।
कल से यहाँ भारी बरसात है।
वर:
वधू के घरवाले वर का स्वागत करेंगे।
वर पाने के लिए लोग तपस्या करते थे।
सोना:
सोने से कई तरह के जेवर बनाते हैं।
मैं बहुत थका हूँ जल्दी सोना चाहिए।
हार:
रामु परीक्षा में हार गया।
पिताजी बेटी के लिए सोने का हार लाए।
ऐसे कुछ भिन्न अर्थवाले शब्दों का संकलन करें।
श्रुतिभ्रम शब्द:
श्रुतिभ्रम शब्द वह है जो उच्चारण में लगभग समानता होने पर भी उनके अर्थ में अंतर है।
जैसे:
अनल/अनिल
माँ ने कहा- बेटी, चूल्हे में अनल लगाओ।
ठंडी अनिल में मत बैठो बेटी...
प्रसाद/प्रासाद:
मंदिर में पूजा के बाद प्रसाद प्राप्त होता है।
अमीर लोग प्रासाद में रहते हैं।
आदि/आदी:
बस्ते में किताबें, छतरी, कलम आदि हैं।
रमेश गाड़ी चलाने में आदी है।



हमने क्या किया?

' सहायक सामग्रियों द्वारा समस्या का अवबोध कराया।
' अंकित वाचन कराया।
' विश्लेषणात्मक प्रश्नों की चर्चा की। 
' टिप्पणी तैयार करायी टेलिफोन पर बातचीत तैयार कराई । 
' आत्मकथांश तैयार करने की अवधारणा पैदा की
' कहानी का आरंभिक अंश लिखवाया । अनेकार्थी तथा श्रुतिभ्रम शब्दों के प्रयोग समझाया।


1 comment:

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