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Sunday, July 14, 2013

संशोधन अथवा എഡിറ്റിംഗ്

     'अजनबी' का पत्र अच्छा निकला है। लगता है 'लेकिन उसे देखते ही मेरी दुविधा निश्चय में बदल गई' अच्छा लगेगा। कक्षा में संशोधन की प्रिक्रिया पर बल देकर ऐसी छोटी-छोटी कमियों को दूर करने की कोशिश हों। " 
     ഇത് വെറും ഒരു ആമുഖ വാചകമല്ല. ഹിന്ദി ബ്ലോഗില്‍ പ്രസിദ്ധീകരിച്ച കുട്ടികളുടെ ഒരു ക്ലാസ്സ് റൂം ഉല്‍പ്പന്നത്തിന് ലഭിച്ച കമന്റുകളിലൊന്നാണ്. ക്ലാസ്സ് മുറികളില്‍ പലപ്പോഴും അവഗണിക്കപ്പെടുന്ന എഡിറ്റിംഗ് എത്രത്തോളം പ്രധാന്യം അര്‍ഹിക്കുന്നതാണെന്ന് ചൂണ്ടിക്കാട്ടുന്നതായിരുന്നു ഹിന്ദി ബ്ലോഗില്‍ മലപ്പുറം ആനമങ്ങാട് ഗവ. ഹയര്‍ സെക്കന്ററി സ്കൂളിലെ ശ്രീ മനോജ് മാഷ് നല്‍കിയ ഈ കമന്റ്. കമന്റ് വായിച്ചപ്പോള്‍ ഈ വിഷയം ഒരു പോസ്റ്റാക്കാന്‍ വൈകിക്കൂടാ എന്നൊരു തോന്നല്‍ മനസ്സിലുണ്ടായി. മനോജ് മാഷിനോടു തന്നെ ഈ പോസ്റ്റ് തയ്യാറാക്കിത്തരാമോ എന്ന് ചോദിച്ചപ്പോള്‍ ശാരീരിക ബുദ്ധിമുട്ടുകള്‍ ഉണ്ടായിരുന്നിട്ടു പോലും അദ്ദേഹം സന്തോഷത്തോടെ  ആ ജോലി ഏറ്റെടുക്കുകയും ചെയ്തു. ഇങ്ങനെയാണ് ഈ പോസ്റ്റ് പിറവിയെടുക്കുന്നത്.

   എഡിറ്റിങ്ങിന്റെ വിവിധ തലങ്ങളെക്കുറിച്ച് നേരത്തേ നമ്മള്‍ മനസ്സിലാക്കിയ കാര്യങ്ങള്‍ പലപ്പോഴും പ്രവര്‍ത്തന ഘട്ടങ്ങളില്‍ ഫലപ്രദമായി പരീക്ഷിക്കാനോ പരിഗണിക്കാനോ തയ്യാറാവുന്നില്ല എന്ന് വേണം കരുതാന്‍. ഇനി നിര്‍ണ്ണായകമായ രണ്ടാം യൂനിറ്റിലേക്ക് കടക്കുമ്പോള്‍ അനായാസേന എഡിറ്റിംഗ് പൂര്‍ത്തിയാക്കാന്‍ മനോജ് മാഷുടെ  ലേഖനം നമുക്ക് വായിക്കാം.
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त्रुटियों का इलाज
( Error treatment )

       संशोधन (Editing) के नाम से हमारी स्रोत-पुस्तकों तथा पाठ्य- पुस्तकों में जो प्रक्रिया है, इसका सही रूप अंग्रेज़ी में Error treatment है। समान अर्थ में हिंदी में इसे कहना पड़ेगा- त्रुटियों का इलाज। असल में यह एक प्रकार का इलाज ही है। प्रचलित पाठ्यचर्या में इसका मुख्य स्थान है।



           पुरानी प्रणाली में इसके लिए त्रुटियों को सीधा सुधारना, नकल करवाना, बारबार लिखने की सज़ा देना आदि तरीके प्रयुक्त थे। Direct Negative Evidence देने की ऐसी प्रक्रियएँ बिलकुल अवैज्ञानिक है, क्योंकि मानव कभी अपनी त्रुटियों के बारे में सुनना नहीं चाहता है। लेकिन, अपनी गलतियाँ खुद समझकर सुधारने का अवसर मिलने पर वह उससे लाभ उठाएगा भी। यह एक संस्कृति है। भाषाध्ययन में इस संस्कृति का मुख्य स्थान है। बच्चों में ऐसी संस्कृति का विकास करने में त्रुटियों के इलाज (Error treatment) का महत्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि बच्चों को अपनी भाषाई गलतियाँ खुद समझकर खुद सुधारने का अवसर इससे मिलता है। ज्ञान निर्मितवादी उपगमन में इसे परोक्ष त्रुटि-सुधार (Indirect Negative Evidence) कह सकते हैं। इससे बच्चे सही भाषा का प्रयोग करने में सक्षम बनते हैं।

इसके लिए -

  • प्रक्रिया के वैज्ञानिक ढंग पर अध्यापिका अवगत हो।
  • लेखन की प्रक्रियाओं (process) का पालन कक्षा में अवश्य करें।
  • संशोधन की प्रक्रिया चलाने के लिए किसी एक दल की उपज को ही, जनतांत्रिक ढंग से, चुन लें।

साधारणतः माध्यमिक स्तर के बच्चों से पाँच प्रकार की त्रुटियाँ होती हैं-

  1. आशयपरक (thematic)/परिकल्पनापरक (conceptual)/अर्थ विषय (semantic)
  2. वाक्य रचनात्मक (syntactic)
  3. रूप परक (morphological)
  4. स्वनिमिक (phonological)/वर्तनी संबंधी (spelling)
  5. प्रोक्तिपरक (discourse level)

          साथ ही चिह्न परक त्रुटियाँ भी होने की संभावना है। कक्षा में इसी क्रम से त्रुटियों के इलाज की प्रक्रिया चलाएँ। एक की पूर्ती करने के बाद ही दूसरे की ओर बढ़ें।


              अध्यापक बंधुओं की शिकायत है कि, प्रत्येक प्रोक्ति के निर्माण के साथ या प्रत्येक लेखन प्रक्रिया के साथ त्रुटियों के इलाज की प्रक्रिया चालाना मुश्किल है, क्योंकि समय पर्याप्त नहीं। क्या, प्रत्येक लेखन प्रक्रिया के साथ यह चलाना है? अगर नहीं तो, किनके के साथ हो सकता है? इसपर ज़रा सोचविचार ज़रूर करना है।


  • कक्षा के बच्चों की भाषाई दक्षता और क्षमता के स्तर के आधार पर अध्यापिका तय कर सकती है कि कहाँ-कहाँ संशोधन की ज़रूरत है।
  • सरल भाषा में तैयार करनेवाली कुछ प्रोक्तियों- जैसे, वार्तालाप- का संशोधन कुछ कक्षाओं में ज़रूरी नहीं होगी। लेकिल, इनके क्रमिक विकास का परिचय दिलाने के लिए शायद कुछ प्रक्रियाएँ चलानी पड़ेगी, वह भी उस संदर्भ में ज़रूरी है तो ही करें।
  • इकाई की प्रोक्तियों (लेखन कार्य) में भाषा प्रयोग, संरचना, रूपरेखा आदि में बच्चों को अधिक जानकारी की ज़रूरत जिसमें होती है, उसकी लेखन प्रक्रिया में संशोधन अवश्य होना है।

             प्रत्येक इकाई में त्रुटियों के इलाज की प्रोक्ति, प्रसंग आदि चुन लेने में अध्यापिका के युक्ति-विचार (logical thinking) का महत्वपूर्ण स्थान है। मुख्य बात तो यह है कि त्रुटियों के इलाज (Error treatment) अथवा संशोधन (Editing) कक्षा में सफ़ल ढंक से चलने के लिए अध्यापिका इसपर पूर्ण रूप से अवगत होना है। इसकी वैज्ञानिकता, सोपान आदि पर जब तक कोई अधूरा या ना के बराबर का ज्ञान रखता है, तब तक वह इसकी सफ़लता पर शंकालू ही रहेगा।


निर्देश :-

त्रुटियों के इलाज (Error treatment) अथवा संशोधन (Editing) के संबंध में अधिक जानकारी के लिए पढ़ें-

  • 5से 8 तक की कक्षाओं की हिंदी स्रोत-पुस्तकें।
  • English Hand Books of Standards 1 to 8
  • Tuition to intuition – Dr. KN. Anandan. 
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तैयारी
मनोज कुमार.पी
सरकारी उच्च माध्यमिक स्कूल, आनमङ्ङाड़
मलप्पुऱम जिला

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2 comments:

  1. लागू भाषा विज्ञान में हाल के शोध से दूसरी भाषा सीखने में शिक्षार्थियों 'त्रुटियों के महत्व पर जोर दिया. इस अनुच्छेद में, दूसरी भाषा सीखने में त्रुटियों के प्रमुख प्रकार पहले संक्षेप में उल्लेख कर रहे हैं. इस interlingual और intralingual या विकासात्मक दोनों कारकों को दूसरी भाषा सीखने त्रुटियों के सूत्रों अनुरेखण द्वारा पीछा किया जाता है. Interlingual त्रुटियों मातृभाषा के हस्तक्षेप के कारण मुख्य रूप से कर रहे हैं, intralingual या विकास संबंधी त्रुटियों को निम्नलिखित कारकों में आरंभ: सरलीकरण, overgeneralization, hypercorrection, दोषपूर्ण शिक्षण, जीवाश्मीकरण, परिहार, अपर्याप्त शिक्षा, और मिथ्या धारणाओं धारणा है. लेख दूसरी भाषा सीखने में त्रुटियों को ठीक करने में शिक्षकों के लिए कुछ सामान्य दिशा निर्देशों के साथ समाप्त.

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  2. मनोज जी,आपने जो किया हैं वह ठीक मौके पर ही किया है। धन्यवाद । मेरि प्रार्थना है कि हिंदी ब्लोग में ५-७ तक की कक्षाओं के लिए कुछ टूल्स प्रकाशित करें ।

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