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Saturday, March 19, 2011

पुस्तकालय - भाषा शिक्षण में एक मूल्‍यवान संसाधन(साभार: teachers of india)स्रोतपुस्तिका 1

ऊषा मुकुन्‍दा पुस्तकालय को शिक्षण खासकर भाषा शिक्षण में एक मूल्‍यवान संसाधन के रूप में देखती हैं। वे पुस्‍तकालय  की भूमिका में एक महत्वपूर्ण आयाम जोड़ती हैं। वे चाहती हैं पुस्तकालय वास्तव में सक्रिय पहल करते हुए पाठ्यक्रम को समृद्ध बनानेवाली गतिविधियों और कार्यक्रमों की शुरुआत करे। लेकिन पुस्तकालय के इस तरह से काम करने के लिए कुछ पूर्व शर्तें हैं:

  1. प्रबुद्ध और सक्रिय पहल करने वाला प्रबन्‍धन हो।
  2. उपयोगकर्ताओं के प्रति दोस्ताना रुख रखने वाला और ऊर्जावान पुस्तकाध्यक्ष हो।
  3. सक्रिय व खुली मानसिकता वाला शिक्षक संघ हो।
  4. जीवन्‍त और दिलचस्पी लेने वाले विद्यार्थी हों।
         इन सभी के एक सामंजस्यपूर्ण समूह के रूप में काम करने से ही वह उपलब्धि सामने आएगी जिसे वे मुक्त पुस्तकालय कहती हैं। इनमें से कोई भी दूसरों से एकदम अलग-थलग नहीं है। इनमें से किसी एक की जीवन्‍त  उपस्थिति भी अन्य तीन में बदलाव ला सकती है। बाकी तो फिर ऐसे पुस्तकालय को कारगर बनाने के लिए पूरी ऊर्जा और इच्छाशक्ति लगा देने पर निर्भर करेगा। पुस्‍तकालय को इस अनुभव सम्‍पन्‍न दृष्टि से देखने के लिए ऊषा मुकुन्‍दा का लेख स्‍कूल का पुस्‍तकालय पढ़ना होगा। तो लेख के शीर्षक पर क्लिक कीजिए।

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